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सुकून और इगो में है रंजिश.. बता रहे हैं प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ फारूक

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बांका लाइव डेस्क : सुकून और इगो- दोनों एक-दूसरे के घोर दुश्मन हैं. दोनों में गहरी रंजिश है और यह रंजिश सनातन है. यदि आप सुकून चाहते हैं तो इगो त्याग दीजिए और यदि इगो कायम रखना चाहते हैं तो सुकून की कामना छोड़ दीजिए. राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत बांका सदर अस्पताल द्वारा मंगलवार को सदर प्रखंड के ककबारा पंचायत में आयोजित जागरूकता शिविर को संबोधित करते हुए मनोवैज्ञानिक डॉ एमयू फारुक ने ये बातें कहीं. शिविर का आयोजन स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया गया था जिसकी अध्यक्षता पंचायत के उपसरपंच बबलू यादव ने की.

बांका सदर अस्पताल के मनोरोग विभाग में पदस्थापित मनोवैज्ञानिक डॉ फारुख ने इस अवसर पर कहा कि इच्छाएं अनंत हैं और हमारे आपके संसाधन सीमित. प्रसिद्ध भारतीय अर्थशास्त्री प्रोफेसर जे के मेहता के सिद्धांतों के हवाले से उन्होंने कहा कि संतोष हमें उपलब्ध संसाधनों और अनंत इच्छाओं के बीच संतुलन की स्थिति में बनाए रखता है. इसलिए संतोष सबसे बड़ा धन है. मेहनत या विरासत से हमें सब कुछ मिलता है. मेहनत अपने हाथ में है जबकि विरासत हमारे हाथ में नहीं होता. फिर हम सुकून भी त्याग दें तो ना तो हम ढंग से सोच पाएंगे और ना ही सफलता उत्पन्न करनेवाली मेहनत कर पायेंगे. ऐसे में मुफीद तो यही है कि हम संतोष रखें.. धैर्य रखें.. और दिल से मेहनत करें. फिर देखिये.. अधिकतम उपलब्धियां हमारे साथ होंगी.
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उन्होंने कहा कि स्थितियां तो समान रहती हैं, नजरिया अलग अलग हो जाता है. हम खुद के भीतर सकारात्मक सोच विकसित करें. मनोरोगों से बचने के लिए यह रामबाण औषधि है. आज बहुतायत में लोग असंतोष से उत्पन्न बेचैनी और चिंता की वजह से मनोरोगों के शिकार हो रहे हैं. इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय भाषण में उपसरपंच डबलु यादव ने शिविर की उपादेयता एवं इससे होने वाले लाभ के बारे में लोगों को बताया. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीण क्षेत्रों में जीने की राह लोग समझ पाएंगे. इस मौके पर पंच कैलाश एवं मानसिक आरोग्य टीम के राजेश रमण, ऐनुल हक एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे.
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