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अपना काम छोड़ बांका में खराब चापाकलों की गिनती कर रहा स्पेशल ब्रांच

...गो कि अब अपने ही  विभाग पर नहीं रहा राज्य सरकार का भरोसा!
Banka live

बांका LIVE डेस्क : क्या अब राज्य सरकार को अपने ही लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग पर भरोसा नहीं रहा? यहां इन दिनों सवाल तो कुछ ऐसे ही उठ रहे हैं. क्योंकि आमजन को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की खुद इसी के द्वारा लगाए गए चापाकलों और खराब पड़े चापाकलों की रिपोर्ट पर सरकार यकीन नहीं कर रही. राज्य सरकार ने अब खराब पड़े चापाकलों का पता लगाने की जिम्मेदारी अपनी खुफिया एजेंसी स्पेशल ब्रांच को सौंपी है. स्पेशल ब्रांच युद्ध स्तर पर जिले के एक-एक सरकारी चापाकल की अद्यतन स्थिति का पता लगाने में जुटी है. जल्द ही इस संबंध में रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी. खराब पड़े चापाकलों की मरम्मती स्पेशल ब्रांच की इसी रिपोर्ट पर प्राथमिकता के आधार पर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की स्थानीय इकाइयों से करायी जाएगी.

बांका जिले में स्पेशल ब्रांच का यह अभियान आरंभ हो चुका है. राज्य सरकार के गृह विभाग के अंतर्गत इस विशेष खुफिया शाखा के सामान्य कर्मी और एसबीओ से लेकर जिला स्तर के पदाधिकारी जिले में पीएचईडी द्वारा लगाए गए सरकारी चापाकलों की कुल संख्या, चालू हालत में चापाकलों की संख्या और खराब पड़े चापाकलों की संख्या का अलग-अलग पता लगाने में रात-दिन जुटे हैं. एक आधिकारिक सूत्र के मुताबिक जिले के सभी 185 पंचायतों में प्रत्येक पंचायत वाइज कुल कितने चापाकल हैं, कितने चापाकल वर्तमान में कार्यरत हैं, कितने खराब पड़े हैं और जो चापाकल खराब पड़े हैं उनका वास्तविक लोकेशन क्या है, इसका सर्वे स्पेशल ब्रांच के अधिकारी और कर्मी कर रहे हैं.

बांका जिले में चल रहे स्पेशल ब्रांच के इस सर्वे अभियान की मॉनिटरिंग के लिए पटना से एक विशेष पदाधिकारी यहां पहुंचे हुए हैं. स्पेशल ब्रांच के द्वारा किए जा रहे सर्वे की प्रत्येक दिन समीक्षा हो रही है. पहले यह काम पीएचइडी विभाग का था. आमतौर पर यह विभाग टेबल रिपोर्टिंग तैयार कर सरकार को भेजता था. चापाकलों की संस्थापना एवं मरम्मती के नाम पर बड़े पैमाने पर हेराफेरी होती थी. जिले में खराब पड़े चापाकलों को ठीक और अच्छे चापाकलों को खराब घोषित कर सरकारी राशि का वारा न्यारा होता था. इससे निपटने के लिए राज्य सरकार ने नई तकनीक इस कार्य में स्पेशल ब्रांच को लगाकर अपनाई है. उम्मीद की जा रही है कि स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट के बाद जिले में चापाकलों की संस्थापना एवं मरम्मती के लिए होने वाले आवंटन और उसके उपयोग में अपेक्षाकृत पारदर्शिता कायम होगी.
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